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VESTIGE ALOE VERA




What is Aloe Vera?
 


Aloe Vera, botanically known as Aloe barbadensis, is a species of a succulent plant that originated in Northern Africa. The specie is frequently used in herbal medicines due to its many health benefits. Aloe Vera is also known as “the miracle plant”, and contains 75 potentially active constituents: vitamins, enzymes, minerals, sugars, salicylic acids and amino acids. It is reported that Aloe Vera extracts may be useful in the treatment of wound and burn healing, diabetes and elevated blood lipids in humans. These positive effects are due to the presence of compounds such as polysaccharides, mannans, anthraquinones and lectins. 






BENEFITS OF ACTIVE INGREDIENTS

Aloe Vera has cooling and soothing properties. It contains more than 20 amino acids that promote healthy hair and skin. 
• It acts as a demulcent to the digestive system and aids in proper digestion. It may also be useful in the cases of constipation, acidity, and liver weakness. 
• Aloe Vera boosts the body's defences at the cellular level, stimulating the immune system.

Dosage: One to two capsules twice a day or as directed by a physician

Indication:  Useful in liver ailments, skin diseases, digestion, constipation, dyspepsia and Rasayan.

Fenugreek Seeds and Its usage - मेथी दाना

 मेथी दाना एक ऐसी औषधि है जो हमारी रसोई में आसानी से उपलब्ध है लेकिन उसके लाभ अनगिनत हैं। 

मेथी दाना वात नाशक और कफ नाशक है।  वात से सम्बंधित जितनी बीमारियाँ हैं उसे मेथी दाना आसानी से दूर करता है, कफ से संबंधित जितनी भी बीमारियाँ हैं उसे भी मेथी दाना दूर करता है 

वात से सम्बंधित बीमारियाँ जैसे 

  • कोहनी का दर्द 
  • कंधे का दर्द 
  • घुटने का दर्द 
  • कमर का दर्द 
  • एड़ी का दर्द 
  • जोड़ों का दर्द 
  • सिर दर्द 
और कफ से सम्बंधित बीमारियाँ जैसे 
  • शुगर 
  • उच्च रक्त चाप 
  • ट्रिग्लीसिराइड्स 
  • कोलेस्ट्रॉल 
  • हार्मोनल प्रॉब्लम 

लेने की विधि 



१ छोटा चम्मच मेथी दाना एक गिलास पानी में रात भर भिगोना है 
सुबह उठकर वही पानी खाली पेट घूँट घूँट करके पीना है और भीगा हुआ मेथी दाना चबा भाबा कर खाना है 




कितने दिनों तक 

ज्यादा से ज्यादा 90 दिनों तक (3 महीनों तक )

ध्यान देने योग्य बातें 

1. मेथी दाना लेने 1 घंटे तक कुछ भी खाना या पीना नहीं चाहिए 
२. मेथी दाना लेने के बाद चाय नहीं पीनी चाहिए, एक घंटे बाद भी नहीं।  चाय और मेथी दाना दोनों एक दुसरे के विपरीत हैं। 


मेथी दाना के और लाभ 

  1. कान दर्द 

एक चम्मच तेल (तेल कोई भी ले सकते हैं नारियल का या सरसों का तेल ) में थोड़े मेथी दाने डालकर उसे गरम करें , उसे ठंडा होने पर एक एक बूँद दोनों कानों में डालिये।  पांच मिनट में दर्द कम हो जायगा और धीरे धीरे ख़तम हो जायेगा। 



२. अनिद्रा - 

मेथी दाने को दोनों हाथों के अंगूठे के दोनों तरफ बांध दो टेप से।  20-40 मिनट के अंदर बहुत अच्छी नींद आ जाएगी। 


3 . माइग्रेन - 

मेथी दाने को दोनों हाथों के अंगूठे के दोनों तरफ बांध दो टेप से।  और इसे दिन और रात बंधा रहने दे सकते हैं। 

4 . शरीर में दर्द 

शरीर के किसी स्थान पर दर्द है वहां ४-५ दाने मेथी के रखकर पट्टी या टेप लगा दें  - १० मिनट में दर्द ठीक

5. कब्जियत 

मेथी दाने का पाउडर बना लें और उसे रात में  एक चम्मच गर्म पानी के साथ लेकर सो जाएँ।  कब्ज ठीक कर देगा।





 

६. कुत्ते के काटने के घाव

 मेथी दाने को पीस के चटनी बना ले - उसे घाव पर लगा दे


सामान्य प्रश्न और उत्तर :

१. मेथी दाने में ऐसा क्या है जो वो दर्द ठीक करता है ?

मेथी दाने में इलेक्ट्रो मेग्नेटिक पावर बहुत ज्यादा है, इसलिए ये सभी दर्द को खींच लेता है 

२. मेथी दाना कोई साइड इफ़ेक्ट करता है?

नहीं, मेथी दाने का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है 





वात पित्त कफ की समानता की आवश्यकता -स्वचिकित्सा

 यदि शरीर में वात आदि दोषों की प्रधानता होती है तो उसका जठराग्नि पर प्रभाव पड़ता है। यदि वायु विषमगति की  हो जाये तो. पाचन क्रिया कमी नियमित और कभी अनियमित हो जाती है। 

पित्त अपने तीक्ष्ण गुणों के कारण अग्नि को तीव कर खाये हुये आहार को समय से पहले ही पचा देता है। कफ अपने मृदु गुण के कारण अग्नि को मृदु बनाकर उचित मात्रा में खाये हुये आहार का सम्यक पाचन नियमित समय में नहीं कर पाता है। 
यदि वात, पित्त और कफ तीनों समान मात्रा में रहे तो उचित मात्रा में खाये हुये आहार का निश्चित समय से पाचन हो जाता है।

वात की वृद्धि से मलाशय पर प्रभाव पड़ता है। मलद्वार में क्रूरता बढ़ती है। इससे मलत्याग देरी से होता है 
पित्त की वृद्धि से मलाशय मृदु होता है। 
कफ की वृद्धि से यही मलाशय मध्ये होता है। 

यदि वात, पित्त कफ समान हैं, तो मलाशय एवं मलद्वार मध्य होता है।  यदि कोई व्यक्ति वात प्रकृति का है या उसको पेट में वायु का प्रभाव बढ़ गया है तो उसका कोष्ठ क्रूर होगा अर्थात उस व्यक्ति को मलत्याग देरी से होगा। 

इसी को कोष्ठवृद्धता (कब्ज़ी )भी कहते है। इसको ठीक करने के लिये औषधि की जरूरत होती है। ऐसी औषधि जो वात को कम करे और पित्त को बढ़ाये। जैसे ही पित्त बढ़ता है, वैसे ही कोष्ठ मृदु हो जाता है। कोष्ठ मृदु हो जाये तो मलत्याग आसान हो जाता है।  मलत्याग करना सबसे अधिक आसान-तभी होता है, जब वात, पित्त, कफ समान हों या सम हों। मलत्याग आसान करने के लिये दूध, त्रिफला चूर्ण बहुत अच्छी औषधियां हैं।


इसे भी पढ़ें 

Triphala Churna and its Benefits - त्रिफला चूर्ण तथा इससे होने वाले लाभ


त्रिफला का शाब्दिक अर्थ है - तीन फल।  त्रिफला तीन फलों से मिलकर बना है :

हरड़े

बहेड़ा

आवला 


 त्रिफला बाज़ार में भी मिलता है लेकिन आयुर्वेद के अनुसार इसकी मात्रा में अंतर है।  बाज़ार में मिलने वाले त्रिफला में ये तीनो फलों का चूर्ण बराबर मात्रा में होता है लेकिन आयुर्वेद की माने तो इसका अनुपात इस प्रकार होना चाहिए :

हरड़े  - 1

बहेड़ा  - 2

आवला  - 3

त्रिफला से होने वाले फायदे 

  1. त्रिफला वात पित्त कफ तीनो का नाश करता है।
  2. त्रिफला सुबह लेने पर शरीर की आवश्यकताएं जैसे विटामिन, कैल्शियम, आयरन इत्यादि प्रदान करता है 
  3. त्रिफला रात में लेने पर पेट की सफाई करता है 
  4. मोटापा कम  करता है 
  5. वजन कम करता है 

त्रिफला चूर्ण लेने की विधि 

त्रिफला सवेरे या रात एक ही बार लेना है, अपनी जरूरत के अनुसार ले सकते हैं। 
जैसे कि अगर कोई रोग है तो रात में लेना उत्तम है 

और यदि कोई रोग नही लेकिन किसी पोषक तत्व की कमी है या अगर स्वस्थ भी हैं तो सवेरे लेना उत्तम है।

सवेरे - गुड़ या शहद - पोषक है मीन्स सारे विटामिन, कैल्शियम, आयरन

रात - दूध या गर्म पानी के साथ - रेचक है अर्थात सफाई करने वाला - कब्जियत मिटा देगा

त्रिफला लेने की मात्रा 

सवेरे - 1 बड़ा चम्मच

रात - 1 छोटी चम्मच




सामान्य प्रश्न 


1 जो स्वस्थ हैं वो त्रिफला खा सकते हैं? 
हाँजी , जो स्वस्थ हैं वे सवेरे खाएं

2. क्या सभी तरह के रोगो में ये 1 :2 : 3  के अनुपात में लेना है?
सिर्फ दो रोगों को छोड़ कर सभी रोगो में इसे 1 :2 : 3  के अनुपात में ले सकते हैं। वे हैं रेडिएशन तथा कैंसर  
रेडिएशन का दुनिया मे इलाज़ नही है लेकिन त्रिफला चूर्ण के पास इसका इलाज है। रेडिएशन के केस में त्रिफला को समान मात्रा में लेना हैं । 
और कैंसर के केस में भी त्रिफला को समान मात्रा में मिलकर लेने से बहुत लाभ होगा। 

3 क्या त्रिफला खाना जरुरी है, तीनों फल में से एक नहीं खा सकते?
त्रिफला नही खा सकते तो आँवला खाइये।

4 क्या त्रिफला को हमेशा खाना है 
नहीं , त्रिफला 3 महीने खाने के बाद 15 - 20 दिन छोड़ देना। फिर खाना। इससे शरीर को इसकी आदत नहीं लगेगी।  

5 क्या त्रिफला को दिन में दो बार खा सकते हैं-

नही, दिन में एक ही बार 

6 क्या गुड़ को डायबिटीज (शुगर) में खा सकते हैं?

हांजी, गुड़ खा सकते हैं।   फ्रूट्स में भी शक्कर होती है, लेकिन डाबटीएस में खा सकते है। 


7 गुड़ के साथ कैसे खा सकते हैं? 
गुड़ चूर्ण के साथ मिलकर थोड़ा तरल हो जाता है उसे हाथ से मसल दो और लड्डू की तरह बना दो और खाओ
 
8 मोटे लोगों को त्रिफला सुबह क्यों लेना है?
जितने लोग मोटे हैं दुनिया मे उनमे कैल्शियम और विटामिन सी कम है।

9 क्या त्रिफला कब्जियत को मिटाता है?
हांजी,  40 साल पुरानी कब्जियत भी मिटाने की ताकत त्रिफला में है 



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